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Nawada News: अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा है हिसुआ का पांचूगढ़ मुसहरी, डायन के शक में कर दी युवती की हत्या_我的网站

来源: 新华社
01:07:17

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Nawada News: अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा है हिसुआ का पांचूगढ़ मुसहरी, डायन के शक में कर दी युवती की हत्या_我的网站

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A |      संवाद सहयोगी, नवादा। हिसुआ नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर पांच में अनुसूचित जाति के लोगों के घर टीवी, मोबाइल, बिजली और नल का जल पहुंच गया, लेकिन अंधविश्वास का अंधेरा नहीं छंट सका। जादू-टोना और स्त्री को डायन से संबोधन, सिर का बाल काटकर अपमानित करने की कुप्रथा ने मंगलवार की रात एक व्यक्ति की जान ले ली और उसकी पत्नी को मार डालने का प्रयास की घटना हुई।,झोपड़ी में रहकर मजदूरी से जीवन यावन करने वाला यह दंपती अपने पड़ोसी मोहन मांझाी के घर बच्चे की छठीयारी के उत्सव में डीजे खराब होने के लिए डायन और जादू-टोना के अंधविश्वास में पीस गया। उत्सव का शोर थोड़ी देर बाद ही चीख में बदल गया।,डीजे में खराबी क्या हुई उत्सव मना रहे लोगों की भीड़ कच्चे घर में सो रहे दंपती पर हमला कर दिया। घर से बाहर खींचकर नाई से सिर का बाल काटा। जूते-च्चपल का माला गूंथा गया। दोनों के गले में पहनाकर अपमानित और पिटाई की गई। पिटाई से पति की मौत होने के बाद भी कोई बचाने की हिम्मत नहीं की।,हिसुआ के पांचूगढ़ मुसहरी टोला अब नगर पंचायत का हिस्सा बन चुका है। करीब 150 मांझी परिवार रहते हैं । करीब सात सौ से आठ सौ की आबादी रहती है। ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं। सुख-सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। बिजली, पानी, सड़क सरकारी योजना से पहुंची लेकिन मेहनत मजदूरी कर घरों में टीवी, हाथों में मोबाइल और कुछ ने पक्के मकान भी बना लिए हैं। पढ़ाई-लिखाई के लिए सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी है। मुसहरी टोले के बच्चों को यहां एकाध वक्त का खुराक मिल जाता है। टोले के किशोर-किशोरी ज्यादा पढ़ नहीं पाते, पास में ही प्राथमिक विद्यालय है। यहां युवक ईंटखोली में काम करने निकल जाते हैं और ताउम्र मेहनत-मजदूरी करके गुजर-बसर करते आ रहे हैं।,ऐसे में इनके बीच कई अंधविश्वास अब भी प्रचलन में हैं। किसी ने काना-फूसी की, तो धीरे-धीरे यही यकीन में बदल जाता है। पांचूगढ़ मुसहरी में मंगलवार की रात वृद्ध दंपती के साथ भीड़ की हिंसा की घटना इसी काना-फूसी और अंधविश्वास का परिणाम है। शहर के लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं लेकिन किसी ने बचाने की हिम्मत नहीं की।,हिसुआ थाने इस अनुसूचित टोला से बमुश्किल 700 मीटर की दूरी पर है। इतनी बड़ी घटना हो जाएगी, किसी को अंदेशा नहीं था। घटना के बाद पुलिस की चौकसी जरूर बढ़ाई गई है। इस बीच देर रात या यूं कहें कि अहले सुबह की घटना को लेकर कई वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं।,हालांकि दैनिक जागरण इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन वीडियो में उस अधड़े को लेकर मारते-पीटते हुए दिख रहे हैं। भीड़ की ओर से "मारो-मारो" तो "छोड़ दो" जैसी मिश्रित आवाज आती है। लात-घुंसा से अधेड़ की पिटाई दिखती है। यह अधेड़ पति अब इस दुनिया में नहीं हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि दंपती का दमाद ईंटखोला पर मजदूरी करता है।。

B |      आईएएनएस, नई दिल्ली। अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी टैरिफ को आर्थिक ब्लैकमेल की संज्ञा दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि ये टैरिफ भारत को आत्मसंतुष्टि और निर्भरता से मुक्त होने के लिए एक थेरेपी के तौर पर भी काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उद्योग, नीति निर्माता और राजनयिक मिलकर काम करें, तो आज का टैरिफ आतंक कल बदलाव का कारण बन सकता है।,

दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा, आगे का काम मुश्किल है, लेकिन ईमानदारी और ठोस प्रयासों से हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। सिर्फ जरूरत है पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने और पूरी ताक से काम करने की। फिलहाल, दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही है। क्या भारत झुकेगा, टूटेगा या फिर वापसी करेगा!,

अमेरिकी टैरिफ की काट को भारत का 'ट्रंप कार्ड'

शुल्क लगाए जाने के बीच सरकार ने वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 50 देशों में विशेष संपर्क कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों को शामिल किया गया है।,

भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है

बता दें कि भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन ये 50 देश मिलकर करीब 590 अरब डॉलर का वैश्विक वस्त्र एवं परिधान आयात करते हैं। इस आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज पांच-छह प्रतिशत है।,एक अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा परिदृश्य में इन देशों के साथ विशेष संपर्क की यह पहल बाजार विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है। इसमें भारतीय मिशन और निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) की अहम भूमिका होगी।',

भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, '25 प्रतिशत शुल्क दर को तो उद्योग ने पहले ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में 30-31 प्रतिशत तक घट गई है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर हो गया है।'。

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Published on:00:42:48


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